शनिवार, 27 नवंबर 2010

बूंदे जो बनती हैं .....


बूंदे जो बनती हैं ..... बन कर बरसती हैं
लगता है उन्हें मेरे अरमान पता हैं


बूंदे जो बरसती हैं ..... बरस कर मिट जाती हैं
लगता है उन्हें मेरे दिल का हाल पता है


बूंदे जो मिटती हैं .... मिट कर बह जाती हैं
लगता है उन्हें मेरे बीतो पलों का इतिहास पता है


बूंदे जो बह कर फिर उठ जाती हैं .... बादल बन जाती हैं
लगता है उन्हें मेरे प्यार को पाने के जज्बे का पता है

21 टिप्‍पणियां:

  1. in boondon ko shayad tumhare jazbaat pata hain......kuchh aur bhi likhen
    always a treat to read your poetry
    bahut sunder!!!

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  2. बहुत ही खुबसुरती से शब्दो का उपयोग किया है सुदंर अभिव्यक्ति

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  3. अजय जी आपके शब्दों ने सचमुच बूंदों के दिल कि बात कह दी,,,,,,,,बेहतरीन रचना |

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  4. boondon ki prakriti,aur tumhare armaan...wah kya jodi hai!
    intensely romantic and stirring.....

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  5. संगीता जी, बेनामी, दीप्ति, स्वर्णलता जी, शिल्पा, और नीति आप सभी ने मेरे इस प्रयास को सराहा, आप सभी को कोटिशः धन्यवाद, कोशिश करूंगा आगे भी आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरूं ... साभार

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  6. wah kya likha hai apne....har line mai gehri baat chippi hai

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  7. its realy nice very heart touching u should give it a book n publish it

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  8. बूंदे जो मिटती हैं .... मिट कर बह जाती हैं
    लगता है उन्हें मेरे बीतो पलों का इतिहास पता है
    xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
    कविता का कोई जबाब नहीं , प्रत्येक पंक्ति दिल को छूने वाली .....बहुत - बहुत आभार .............नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

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  9. "बूंदे जो बह कर फिर उठ जाती हैं .... बादल बन जाती हैं
    लगता है उन्हें मेरे प्यार को पाने के जज्बे का पता है "
    बहुत सुन्दर
    हर पंक्ति भावपूर्ण

    आभार

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  10. सुन्दर शब्दों की बेहतरीन शैली ।
    भावाव्यक्ति का अनूठा अन्दाज ।
    बेहतरीन एवं प्रशंसनीय प्रस्तुति ।

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  11. namaste sir,

    apka blog shabdon ki ek shandar prastuti hai, aap ke jitana to nahi, par ek koshish maine bhi ki hai, yadi sambhav ho to ek nazar us par bhi dalen.
    krati-fourthpillar.blogspot.com

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  12. wo sagar he ap aur apki kavita jo jasbe se laba lab bhari he.......

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  13. अच्छी फोटो .....व अच्छी पन्तियाँ

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  14. lagta hai bundo se aapki guftagu mausam ko bhi bha gayi hai,baadal umadh aaye hai bunda baandi bhi hone lagi hai yanha!! par is baar mai kuch bunde sahej kar rakh lungi aur puchhungi usse bite palo ka itihaas!!! sundar kavita hai ajay..:)

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  15. सरोज, रेवा, रैन, गरिमा, केवलराम, राजीव, कृति, सुषमा, आशा, मंजुला और रत्ना आप सभी ने मेरे इस प्रयास को सराहा, आप सभी को कोटिशः धन्यवाद, कोशिश करूंगा आगे भी आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरूं ... साभार

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